मेरी पहली कविता (Journey from Home to USA to INDIA/भारत)
तू चलता रह अपनी मंजिल की ओर
मत सोच क्या सही गलत,
ये दुनिया तुझको कम आंकेंगी पर तू दिनबदिन आगे बढ़
रख विश्वास तू अपने हुनरपर और तेरे अच्छे कर्मो पर
तू फल की चिंता मत कर बस तू करता जा अपने कर्म को और निभाता जा अपने कर्तव्य को..
तुझे ना रोक सकेगा और कोई क्योंकि तेरे सर पे हाथ है खुद ईश्वर का...
तू बस कर्म कर और चलते जा अपनी मंजिल की ओर... बाकी सब देख लेगा ये ऊपर वाला according to your अच्छे कर्म..
बस ध्यान रख के थक जाए तो थोड़ी देर आराम कर पर तू हार मान कर कभी रुकना मत...
और खुद को तू कभी कम मत आंक, क्योंकि सबको बनाने वाले ने बनाया है इक खास वजह और काबिलियत के साथ बस हमें बनाने वाले भगवान पर तू विश्वास रख और विश्राम कर.. बस इस बात को साथ रख धीरे धीरे तू आगे बढ़.. धीरे धीरे तू आगे बढ़..
तू चलता रह अपनी मंजिल की और... रास्ते में मिलते रहेंगे विघ्न हजार पर हमें उस विघ्न को हरने के लिए साथ आएंगे विघ्नहर्ता भी तेरे साथ.. बस तू उनको एक पुकार दे, और विघ्नहर्ता की उंगली पकड़कर तू अपनी मंजिल पार कर... बस तू धीरे-धीरे आगे बढ़..
चलते चलते थक जाएं तो थोड़ी देर विश्राम कर और फिर से अपनी मंजिल की और कदम बढ़ाके तू आगे बढ़.. बस तू चलता रेह धीरे धीरे अपनी मंज़िल की और बस बीच रास्ते रुकना मत.. तू दोड़, परिश्रम कर और एक दिन जरूर पहुँच जाएगा तू मंज़िल की उस पार… ख़ुद पर और ख़ुद को बनाने वाले भगवान पर तू भरोसा कर । तू चलता रह अपनी मंजिल की ओर, तू चलता रह अपनी मंजिल की ओर...
- Deval Mali
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